कैंसर के बेहतर इलाज का रहस्य, हमारे पेट के बैक्टीरिया में छिपी है बड़ी खोज

वैज्ञानिकों ने पेट (gut) के भीतर कुछ ऐसे जैविक संकेतों (biological signals) की खोज की है, जो गैस्ट्रिक कैंसर (GC), कोलोरेक्टल कैंसर (CRC) और इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (IBD) जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान और प्रबंधन को आसान बना सकते हैं.
माइक्रोबायोम और मेटाबोलोम: क्या है ये नई तकनीक?
- माइक्रोबायोम (Microbiome)-हमारे पाचन तंत्र में रहने वाले बैक्टीरिया का समुदाय.
- मेटाबोलोम (Metabolome)-भोजन के टूटने और रासायनिक प्रतिक्रियाओं के दौरान शरीर और सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न छोटे अणु.
अध्ययन में पाया गया कि कुछ विशिष्ट बैक्टीरिया और मेटाबोलाइट्स इन बीमारियों के साथ लगातार जुड़े रहते हैं। यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि ये बायोमार्कर्स (Biomarkers) भविष्य में बिना किसी दर्दनाक प्रक्रिया (कम आक्रामक तरीके) के बीमारियों का जल्दी पता लगाने में मदद कर सकते हैं.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कमाल
बर्मिंघम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग और AI एल्गोरिदम का उपयोग करके GC, CRC और IBD के रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया. रिसर्च में पाया गया कि एक बीमारी (जैसे गैस्ट्रिक कैंसर) से सीखे गए मॉडल दूसरी बीमारी (जैसे IBD) के लक्षणों की पहचान करने में सक्षम थे. इसका मतलब है कि भविष्य में एक ही डायग्नोस्टिक टूल से कई बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा.
उपचार की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव
अध्ययन के मुख्य सह-लेखक डॉ. एनिमेश अचारजी ने बताया, "वर्तमान निदान के तरीके जैसे एंडोस्कोपी और बायोप्सी प्रभावी तो हैं, लेकिन वे महंगे और आक्रामक हो सकते हैं। कभी-कभी ये शुरुआती चरणों में बीमारी को पकड़ने में विफल रहते हैं. हमारे द्वारा खोजे गए बायोमार्कर्स अधिक सटीक और व्यक्तिगत उपचार (Personalized Treatment) की ओर ले जाएंगे."
- गैस्ट्रिक कैंसर (GC)- इसमें 'फर्मिक्यूट्स' और 'बैक्टेरोइडेट्स' जैसे बैक्टीरिया और 'टॉरिन' जैसे मेटाबोलाइट्स की अधिकता देखी गई.
- कोलोरेक्टल कैंसर (CRC)- 'फ्यूसोबैक्टीरियम' और 'एंटरोकोकस' जैसे बैक्टीरिया इसके मुख्य संकेत पाए गए.
- IBD- इसमें 'लक्नोस्पिरेसी' परिवार के बैक्टीरिया और 'यूरोबिलिन' जैसे मेटाबोलाइट्स महत्वपूर्ण थे.
यह शोध यह भी स्पष्ट करता है कि पेट की बीमारियां आपस में जैविक रूप से जुड़ी हुई हैं। शोध दल अब इन मॉडलों को बड़े स्तर पर रोगियों पर आज़माने और ऐसे गैर-आक्रामक परीक्षण (Non-invasive tests) विकसित करने की योजना बना रहा है, जो कैंसर के खतरे को कम कर सकें. यह स्टडी'जर्नल ऑफ ट्रांसलेशनल मेडिसिन' में प्रकाशित हुआ है, जो भविष्य में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों के निदान और उपचार में क्रांति ला सकता है.


